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सार्वजनिक·3 सदस्य

सेवा भारती अवधप्रांत
प्रान्त प्रचार प्रमुख

अभिषेक कुमार सिंह

किशोरी विकास प्रशिक्षण वर्ग


किशोरी विकास : भारत में युवा पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण


भारत में दुनिया की सबसे बड़ी किशोर आबादी है जो कि लगभग 253 मिलियन के करीब है, और यहाँ हर पांचवां व्यक्ति 10 से 19 साल की उम्र के बीच का है। यह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूपसे भारत के लिए बहुत फायदे की बात है, अगर यहाँ बड़ी संख्या में मौजूद किशोर-किशोरी सुरक्षित, स्वस्थ एवं शिक्षित हों, और सभी सूचना एवं जीवन कौशल में दक्ष हो कर देश के विकास में सहयोग करें ।

किशोर और किशोरियों को उन्हें प्रभावित करने वाले मुद्दों की जानकारी का अभाव है और उन्हें सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी क्षमताओं को विकसित करने का पूरा मौका नहीं मिल रहा है | खासकर किशोरियां रूढ़िवादी सामाजिक मानदंडों के कारण काफी संवेदनशील हो जाती हैं जिसकी वजह से उन्हें उन्मुक्त स्वतंत्र रूप से घूमने, पढ़ने लिखने, काम करने, सामाजिक रिश्तों, शादी करने आदि के निर्णय लेने की आजादी छिन जाती है ।

घरेलू जिम्मेदारियों, शादी, बाल श्रम,रोज़गार के सम्बन्ध में शिक्षा की सीमित प्रासंगिकता, स्कूलों की दूरी, स्कूलों में शौचालय का न होना,आदि की वजह से 43 प्रतिशत लड़कियों को समय से पहले ही स्कूल छोड़ना पड़ता है ।कई देशों में मासिक धर्मके कारण लड़कियों का जीवन अकल्पनीयरूप से अस्तव्यस्त हो जाता है । भारत लगभग 42 प्रतिशत लड़कियां डिस्पोजेबल सेनेटरी नैपकिन की जगह कपड़े का उपयोग करती हैं।

समाज में व्यापक रूप से प्रचलित बाल विवाह लैंगिक असमानता और भेदभाव का स्पष्ट प्रमाण प्रदान करता है। अनुमान के मुताबिक मुताबिक भारत में 18 वर्ष से कम आयु की 1.5मिलियन लड़कियों की शादी प्रत्येक वर्षहोती है, जिसके कारण आज विश्व में सबसे ज्यादा बाल-विवाह भारत में होते हैं जो कि पूरे विश्व में होने वाले बाल-विवाह का एक तिहाई है ।

किशोर अवस्था में गर्भधारण करने वाली लड़कियों में मातृत्व एवं नवजात शिशुओं से सम्बंधित बीमारी एवं उनसे होने वाली मृत्यु का ख़तरा अधिक रहता है ।ग्रामीण क्षेत्रों में 15-19 वर्ष की आयु की लगभग 9 प्रतिशत किशोरियाँ व शहरी क्षेत्रों में लगभग 5 प्रतिशत किशोरावस्था में ही बच्चे पैदा कर रही हैं । किशोरावस्था की माताओं के बच्चों में बौनेपन का खतरा अधिक रहता है । इसकी वजह से बच्चों में दिमागी और शारीरिक विकृति देखने को मिलती है और युवा अवस्था में उनकी उत्पादकता प्रभावित होती है ।

किशोर-किशोरियों की क्षमताओं का समुचित उपयोग कर पूरी परिस्थितियों को बदला जा सकता है जिसके लिए उनकी सही उम्र में शादी, किशोरियों के पोषण एवं स्वास्थ्य में सुधार, अच्छी शिक्षा की व्यवस्था, कौशल विकास और कार्य करने और बेहतर नागरिक बनने के मौके उपलब्ध कराना ज़रूरी है।

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नर सेवा नारायण सेवा

सेवा भारती, जिसे अवध प्रांत की अग्रणी सामाजिक संस्थाओं में से एक माना जाता है, शिक्षा, स्वास्थ्य, सशक्तिकरण, सामाजिक कल्याण एवं आपदा राहत के माध्यम से समाज के उत्थान हेतु निरंतर कार्यरत है। वर्ष 2010 में स्थापना के बाद से संगठन ने 1,95,867 से अधिक लाभार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों से प्रेरित एवं 1,050 समर्पित स्वयंसेवकों के सहयोग से सेवा भारती निरंतर समाज सेवा में अग्रसर है।

पारदर्शिता, समर्पण एवं स्थायी सामाजिक परिवर्तन के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ सेवा भारती यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक सहयोग समाज में सार्थक प्रभाव उत्पन्न करे तथा सभी के लिए एक उज्ज्वल, समरस एवं समावेशी भविष्य का निर्माण हो।

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